तेरापंथ का महाकुम्भ:-मर्यादा महोत्सव का भव्य कार्यक्रम आयोजित
गंगापुर:Suresh Sharma-तेरापंथ धर्मसंघ अनुशासित,मर्यादा,व्यवस्थित व प्राणवान धर्मसंघ है। श्रद्धा,समर्पण व साहस के योग से यह एक विलक्षण संघ बन गया है।इसमें रहने वाला हर सदस्य अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है।तेरापंथ धर्म संघ की आज जो पहचान बनी हैं, उसमे आचार्यो व साधु-साध्वियों का कर्तव्य बोल रहा है।यह कर्तव्य एक पक्षीय होता तो संगम इतना मकबूल नही बनता,इस दिशा में श्रावक श्राविकाओं का योगदान भी अविस्मरणीय है। उपर्युक्त विचार डॉ. साध्वी सम्पूर्ण यशा ने तेरापंथ धर्मसंघ के 156वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुऐ स्थानीय कालू कल्याण कुंज में व्यक्त किये।
अणुव्रत समिति अध्यक्ष रमेश हिरण ने कहाँ कि किसी भी व्यक्ति के मन में जिज्ञासा हो सकती है,यह मर्यादा महोत्सव किसलिये| कार्यक्रम में स्थानीय महिला मंडल की ओर से प्रस्तुत रूपक "अपनी कहानी-अपनी जुबानी" ने मौलिक प्रभावी दी,जिसमे श्रद्धा,अनुशासन,मर्यादा,समर्पण तथा साहस का समागम तेरापंथ को बताया। ज्ञानशाला के बच्चों ने इसी विषय पर अपनी प्रस्तुति दी जिसमे उपस्थित दर्शकों ने *"ओम अर्हम"* की ध्वनि कर बच्चों का उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आर्षवाणी तथा साध्वी सँवर प्रभा के मंगलाचरण से हुआ। संयोजक सभा के मंत्री घेवरचद बाबेल ने आज के दिवस की महत्ता को उजागर किया|
इसी कार्यक्रम में नानालाल बापना, प्रकाश बोलिया, चांदमल सुतरिया आमली व नेमीचंद जी भंडारी ने गीतिका की प्रस्तुति दी। महिला मंडल ने अपनी गीतिका गोखमयी *"विरदावलिया युगों युगों तक गाये"* की प्रस्तुति ने सबको भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान ज्ञानशाला व महिला मण्डल के सदस्यों को उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार वितरण किया गया। अतिथियों का स्वागत नवरतन हिरण द्वारा किया|इसी कार्यक्रम में आमली,बागोर,पितास, घोडास,सालेरा व अन्य समीपवर्ती क्षेत्रो से सहभागिता दी|
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