प्राणी मात्र की सेवा ही परमात्मा की सेवा: संत धर्मानंद


भीलवाड़ा । संतो की शिक्षा स्थली विद्या लोक न्यास के संस्थापक संत धर्मानंद ने कहा कि‍ प्राणी मात्र की सेवा ही परमात्मा की सेवा है। हमे जीवन गौ-सेवा, यज्ञ, दान-पुण्य व सत्कर्मो में लगाना चाहिए। ८४ लाख योनियों के बाद हमें यह मनुष्य जीवन मिला है।  संत शनिवार को हमीरगढ़ रोड स्थित रामधाम में चल रही विशेष प्रवचन माला के तहत श्रद्धालु समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा की लगन, निष्ठा, नैतिकता व ईमानदारी से किया गया कारोबार भी सच्चे मायने में परमात्मा की सेवा है। मनुष्य बाल्यावसथा अर्थात बचपन खेलकूद में बिताता है। युवावस्था में भोग विलासता में अपना अमुल्य समय गवा देता है। बुढापा आते ही नाना प्रकार की चिंताओं में रहता है। इस अवस्था में उसे एक ही चिंता सताती है की उसने पूरा जीवन बिना परमात्मा की सेवा व पूजा के ही बिता दिया। इस अवस्था में उसे लगता है की उसे साधु-संतों की सेवा व सत्संग में रहकर अपने जीवन को आनंदित बनाना था लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। इसलिए व्यक्ति को होश संभालने के साथ ही परमात्मा की सेवा व साधु संतों की संगती करना चाहिए। ऐसा नहीं करने वाला अंत में पछताता है। श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट के प्रवक्ता गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया की रामधाम में प्रतिदिन सुबह 10 से 11 बजे तक विशेष प्रवचन माला चल रही है। शनिवार को संत ने शिव अभिषेक का महत्व भी बताया। कार्यक्रम में वीणा मानसिंहका, सुशीला माता, मंजू माता, प्रीतम शर्मा आदि का सहयोग रहा।

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