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अब 50 से ज्यादा कोरोना संक्रमित आने पर भी नहीं चिंता
November 19, 2020 • Raj Kumar Mali • भीलवाड़ा हलचल
 

भीलवाड़ा (हलचल) कोरोनाकाल के दौरान शहर में पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज आया तो प्रशासन से लेकर नेता तक सतर्क हो गए और आनन-फानन में जांच से लेकर अस्पतालों में वेंटिलेटर तक की व्यवस्था कराई, लेकिन करीब जब संक्रमितों की संख्या 100 को पार करने लगी तो व्यवस्थाएं खुद ही संक्रमित हो गई। एक बार फिर अब संक्रमितों का ग्राफ बढऩे लगा है लेकिन किसी को न मास्क की परवाह है और न ही सोशल डिस्टेसिंग की पालना की जा रही है। कागजों में ही सब कुछ चल रहा है। 
इन दिनों हालात यह है कि पचास से जयादा पॉजिटिव आने पर न ट्रेसिंग और न ही आसपास रहने वाले लोगों की जांच की कोई सुविधा है। दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों मेंं कोरोना की दूसरी व तीसरी लहर की तरह भीलवाड़ा जिले में भी कोरोना संक्रमण की हालत बेकाबू होने लगी है। वैसे तो जिले में हर दिन पचास से ज्यादा की संक्रमित की रिपोर्ट सरकार की ओर से जारी की जा रही है, लेकिन हकीकत है कि अब कोरोना की जांच भी नाम मात्र की रह गई है। नतीजतन लोगों को खुद ही बचाव के लिए जांच केन्द्रों पर जाकर अपने सेंपल की जांच करानी पड़ रही है। यही कारण है कि जब ज्यादा सेंपल की जरूरत है, तब जांच की संख्या भी पहले की तुलना में आधी रह गई है। 
पहले टीम खुद जाकर करती थी जांच :
कोरोनाकाल की शुरुआत में टीम सब्जी मंडी व्यापारियों, हेयर ड्रेसर की दुकानों पर जाकर खुद रेण्डम सेंपल लेकर जांच कराई जाती थी। इसके अलावा वार्डों व मोहल्लों में पॉजिटिव आने पर घर और आस पास के क्षेत्र में  जांच कर संक्रमण के फैलाव को पता लगाया जाता था, लेकिन इन दिनों ज्यादातर जांच की व्यवस्थाएं ठप हो चुकी हैं।
पोस्टर से कर रहे बचाव :
कोरोना संक्रमण की शुरुआत में पॉजिटिव आने पर पहले दो किलोमीटर, फिर एक किलोमीटर के दायरे में कफ्र्यू लगाकर लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया जाता था। संक्रमित के आसपास के क्षेत्र को हाइरिस्क जोन घोषित कर लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी जाती थी, लेकिन अब पॉजिटिव आने पर केवल संक्रमित के घर के बाहर एक पोस्टर लगाया जाता है, उसे भी लगाने के बाद कोई देखने तक नहीं आता। यहां तक कि कोरोना पॉजिटिव घर में हैं या बाहर घूम रहे, इसका पता लगाने की चिंता भी दिखाई नहीं पड़ती। ट्रेसिंग के नाम पर केवल एक बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी संक्रमित को दवा देकर जाता है, उसके बाद वह नेगेटिव हुआ या नहीं, इसकी चिंता कोई नहीं करता। परिजनों के सेंपल भी नहीं लेते पूर्व में कोरोना संक्रमित आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम न केवल उसके परिजनों के सेंपल लेकर जांच कराती थी, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के सेंपल की जांच होती थी, जिससे पता चल सके कि क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का फैलाव कितना है। अब पॉजिटिव के परिजनों के ही सेंपल नहीं लिए जाते, जिससे संक्रमण का खुद प्रशासन को पता नहीं लग पाता।
मॉनिटरिंग को भी लगी जंग :
कोरोना के शुरू में प्रशासनिक स्तर पर संक्रमण की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स का गठन, विभिन्न प्रकोष्ठों का गठन, कंट्रोल रूम की स्थापना, वार्डों में मॉनिटरिंग के लिए आरआरटी टीमों का गठन, सेंपल जांच के लिए मोबाइल टीमों का गठन सहित अनेक कवायद की गई थी। हालांकि उस दौरान जिले में कोरोना पॉजिटिव की संख्या दो अंकों में ही थी, लेकिन अब जब सरकारी रेकॉर्ड के अनुसार जिले में संक्रमितों की संख्या हजारों को पार कर चुका है, तब ये व्यवस्थाएं जिले में दिखाई नहीं पड़ती। यही कारण है कि इन दिनों जिले में कोरोना संक्रमण का फैलाव किस स्तर पर है और कोरोना की लहर की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा संभवत: प्रशासन को भी नहीं है।
चिकित्सक से लेकर अधिकारी आ रहे पॉजिटिव :
जिले में कोरोना संक्रमण की स्थिति का अंदाजा इस बात से सहज लगाया जा सकता है कि जिले में चिकित्सा विभाग के मुखिया सीएमएचओ, कई अन्य चिकित्सक से लेकर कई प्रशासनिक कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं।
जब बचाव की ज्यादा जरूरत, तब व्यवस्थाएं संक्रमित :
इन दिनों जिले में कोरोना संक्रमण का फैलाव सभी के लिए चिंता का कारण बना है, ऐसे में संक्रमण से बचाव की ज्यादा जरूरत है, लेकिन इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्थाएं चौकन्नी होने के बजाय खुद ही संक्रमित दिखाई पड़ रही हैं। पहले हर दिन कोरोना कोर कमेटी की बैठक होती थी, जिसमें संक्रमण के फैलाव की समीक्षा कर व्यवस्थाएं की जाती थी, लेकिन अब कोर कमेटी की बैठक भी लंबे समय से नहीं हो पाई। यह स्थिति तो तब है जब कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री स्तर से नियमित वीसी व बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
वैसे शहर में कोरोना से मुकाबले के लिए चिकित्सा महकमा अस्पताल में तो काफी प्रयास कर रहा है लेकिन शहर में लोग बेपरवाह नजर आ रहे है। बिना मास्क के आवाजाही आम बात हो चली है। दुकानों पर भी लोग बिना मास्क के नजर आते है। हालात यह है कि लोग मान चुके है कि कोरोना जा चुका है लेकिन चिकित्सा महकमा आने वाली विपदा को लेकर चिंतित है। कुछ संगठन जागरूकता के नाम पर मास्क वितरित कर रहे है लेकिन लोगों ने मास्क का भी दुरूपयोग करना शुरू कर दिया है।