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बाबा शेवाराम साहब जी का 104वां प्राकट्य उत्सव मनाया
October 31, 2020 • Raj Kumar Mali

भीलवाड़ा हलचल। हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर  में सतगुरु बाबा शेवाराम साहब जी का 104वां प्राकट्य उत्सव हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। पुरुषोत्तम मास से प्रारंभ हुए 45 दिवसीय आध्यात्मिक एवं धार्मिक अनुष्ठान संपूर्ण होकर पूर्णाहुति भी हुई। परंपरा अनुसार विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोचार के साथ महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में प्रातःकाल ध्वजारोहण संतों महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने किया। इससे पूर्व सतगुरु की समाधि साहेब पर ध्यान मौन एकाग्र पूजन वंदन हुआ। श्रद्धालु ताराचंद, हेमंत रामरख्यानी परिवार रतलाम, दुबई, खटवानी परिवार अमेरिका सहित बड़ौदा, सूरत, अजमेर, कोटा, वाराणसी, कोडीनार, अहमदाबाद, मुंबई व अन्य शहरों के श्रद्धालु, आश्रम के ट्रस्टीगण आदि ने कथा के दौरान पूजन अर्चन किया एवं संत महात्माओं तथा व्यासपीठ का पूजन अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

दो दिवसीय श्री रामायण अखंड पाठ संपूर्ण होने पर भोग लगाया गया। बाबा शेवाराम साहब जी के प्राकट्य उत्सव पर लड्डू महाप्रसाद का दीप प्रज्वलित कर भोग लगाया गया। सभी श्रद्धालुगण संगीत एवं भजनों पर झूम उठे। अजमेर के श्रीमहंत स्वरूपदास, स्वामी अर्जुनदास, स्वामी ईश्वरदास, पुष्कर के श्रीमहंत हनुमानराम, रीवा के स्वामी कमलदास ने अपने आशीर्वचन एवं दर्शन दिए।

 

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने  भजन *"बाबा हरिराम बाबा शेवा राम बाबा गंगाराम तुहिंजा बचड़ा आहियूं तुहिंजे चरणन में सिर था निवायूं* " प्रस्तुत करते हुए कहा कि व्यवस्थाओं, पद्धतियों, पूजन पाठ का पालन जो विभिन्न आश्रमों में होता है, उनको गृहस्थो को अपनाना चाहिए। संतो के ऊपर किसी प्रकार का बंधन नहीं है। संतगण संकल्प को पूर्ण करने वाले हैं।  कोरोना काल से जो सेवा कार्य चल रहे हैं, उनको पूर्ण करने की शक्ति एवं सामर्थ्य गुरू और संतों के आशीर्वाद से ही प्राप्त हो रही है।

 

व्यासपीठ के सम्मान में भजन *हरि की कथा सुनाने वाले तुमको लाखों प्रणाम*  संगीतमय प्रस्तुति दी गई ।व्यासपीठ की विदाई पूजन अर्चन कर शाल, मौली, पुष्प माला आदि द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर संत मयाराम, गोविंदराम, संत राजाराम एवं अन्य उपस्थित रहे। आचार्य पंडित सत्यनारायण शास्त्री, चंद्रशेखर शास्त्री, मनोजकृष्ण शास्त्री,  जितेंद्र शास्त्री, भरत चतुर्वेदी, मनमोहन शर्मा आदि ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मन्त्रोचार किया गया। हवन यज्ञ पूर्णाहुति के पश्चात कन्याओं का भोज व संतों का ब्रह्मभोज हुआ। इस बार आम भंडारा नहीं होकर अन्नपूर्णा रथ से कच्ची बस्तियों में प्रसाद वितरण हुआ। संतों महात्माओं व विप्रजनों को परंपरा अनुसार विदाई दी गई। उत्सव के कुशल एवं सफल संपूर्ण होने पर हर्ष व्यक्त किया गया।

 

आज व्यास पीठ से स्वामी योगेश्वरानंद जी महाराज कल्याण आश्रम अमरकंटक ने श्री महादुर्गा लीला कथा का वाचन किया। कथा के दौरान अंबे गौरी के आकर्षक स्वरूप का दर्शन हुए।  सायंकाल में श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए व्यासपीठ से कथा प्रवक्ता ने कहा कि ईश्वर सत्घन, घटघन, चैतन्य है। वही हमें इस प्रकृति की समस्त घटनाओं एवं आनंद की अनुभूति का भान करवाता है। आज श्री भागवत महापुराण कथा संपूर्ण हुई एवं कथा का विश्राम हुआ। 

सायंकाल में गुरुओं की समाधि साहब पर पूजन, अर्चना, चादर चढ़ाने का कार्यक्रम हुआ। रात्रि में शरद पूर्णिमा के अवसर पर करुणामयी लीला मंडल बरसाने द्वारा महारास लीला हुई । अंत में पल्लव कार्यक्रम हुआ, जिसमें सनातन धर्म एवं विश्व कल्याण सहित  कोरोना वायरस से मुक्ति की प्रार्थना की गई।