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चुनाव में भाषा का स्तर गिरता हुआ,आखिर कब तक चलेगा?
November 21, 2020 • Raj Kumar Mali • भीलवाड़ा हलचल
 

जहाजपुर (देवेन्द्र सिंह राणावत) । उपखंड क्षेत्र में चुनावी माहौल में भाषा का स्तर गिरता हुआ जा रहा है, अपनी राजनीति चमकाने और दूसरे को नीचा दिखाने के लिए नेता अमर्यादित भाषा बोलते हैं। वर्तमान चुनावी माहौल में नेता और कार्यकर्ताओं द्वारा विकास की बात नहीं की जा रही है बल्कि अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जा रहा है जिसे हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है ।

चुनाव के दौरान लाइमलाइट में बने रहने के लिए नेता अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव के माहौल में चोर, नमक हराम, निकम्मा, नीच आदमी, अनपढ़, गंवार, कुत्ता, गधा, बंदर, सांप-बिच्छू....चौंकिए नहीं...ये सब विशेषण गाली नहीं हैं, बल्कि हमारे माननीय राजनेताओं के बोल हैं. आजकल राजनीति के गलियारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल आम हो चला है लेकिन प्रत्याशी के प्रचार में भी नेता अपनी भाषा से की जनता को रूबरू करा रहे हैं प्रत्याशी के प्रचार में विकास की बात करने की बजाए गाली गलौज कर रहे हैं, क्षेत्र में कई नेताओं के चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता उन के अद्भुत भाषा के वीडियो एक के बाद एक वायरल हो रहे हैं। क्षेत्र में जिम्मेदार नेता और कार्यकर्ता जोश में होश खो रहे हैं वे यह नहीं समझते कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है? ऐसे नेता राजनीति में आने वाली अगली पीढ़ी को क्या सिखा रहे हैं? नेताओं की गंदी होती जुबान और उस पर पार्टी नेतृत्व की तरफ से अंकुश न लगाया जाना समाज के लिए बेहद घातक हो सकता है। सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसे विडियो तेजी से वायरल होते हैं। अपने आप को जनता के बीच में बनाए रखने के लिए और दूसरों को नीचा दिखाने के लिए भाषा का स्तर अच्छा नहीं है।