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किसान नेताओं व केंद्र के बीच वार्ता विफल, कृषि मंत्री के न आने सेे किया वॉकआउट, कानून की कॉपी फाड़ी
October 14, 2020 • Raj Kumar Mali

 चंडीगढ़। नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ तीन सप्ताह से धरना दे रहे पंजाब के 29 किसान संगठनोंं की केंद्र सरकार से बातचीत बेनतीजा रही। बैठक में कृषि मंत्री के न आने के कारण किसान नेता नाराज हो गए। किसान नेताओं ने इसके बाद बैठक का बहिष्कार कर लिया और बाहर आ गए। इसके बाद उन्होंने कृषि भवन के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ दी।

केंद्र सरकार से वार्ता के लिए आज बुधवार को पंजाब के 29 किसान संगठनों के प्रतिनिधि कृषि भवन पहुंचे, लेकिन बैठक में केंद्रीय मंत्री नहीं होने के कारण किसान नेता नाराज हो गए। किसान नेताओं ने कृषि भवन के बाहर बिल की कापियां भी फाड़ी। किसान संगठनों के 15 दिनों से चल रहे संघर्ष को देखते हुए बुधवार को रखी गई बैठक खासी अहम मानी जा रही थी।

किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कृषि सचिव संजय अग्रवाल से कहा कि बैठक में मंत्री को होना चाहिए था। कृषि सचिव ने प्रोटोकाल का हवाला देते हुए कहा कि पहले उनके साथ बैठक होगी, बाद में मंत्री के साथ। इस पर किसान संगठन नहीं माने।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ केंद्र सरकार उन्हें वार्ता करने के लिए बुलाती है। दूसरी तरफ आठ केंद्रीय मंत्रियों को किसान, आढ़तियों व कृषि विज्ञानियों से बात करने का जिम्मा देती है। केंद्र सरकार किसान संघर्ष को विफल करने की कोशिश कर रही है। किसान संगठनों ने कहा कि पंजाब में संघर्ष जारी रहेगा।

किसान संगठनों से वार्ता विफल होने के बाद अब सबकी नजर वीरवार को होने वाली बैठक पर टिक गई है, क्योंकि किसान संगठनों की होने वाली इस बैठक में फैसला होगा कि रेलवे ट्रैक को खाली किया जाए या नहीं। क्योंकि पिछले 15 दिनों से रेवले ट्रैक पर डटे होने के कारण पंजाब में जहां पावर संगठन उत्पन्न हो गया है। वहीं, खाद्य नहीं आने के कारण इसका आने वाले गेहूं के सीजन पर भी असर पड़ सकता है।