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किसान वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन द्वारा करें आजीविका में सुधार-डाॅ. यादव
November 8, 2020 • Raj Kumar Mali • भीलवाड़ा हलचल

  भीलवाड़ा  हलचल। अनुसंधान निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति उप-परियोजनान्तर्गत वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तकनीकी विषय पर तीन दिवसीय कौशल प्रशिक्षण दिनांक 06 से 08 नवम्बर 2020 तक कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा पर आयोजित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डाॅ. सी. एम. यादव ने बताया कि किसान वर्मीकम्पोट उत्पादन कर अपनी आजीविका सुदृढ़ कर सकते है। डाॅ. यादव ने वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना हेतु बेड बनाना, प्रति बेड केंचुओं की मात्रा, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन में लगने वाला समय तथा वर्मी कम्पोस्ट को तैयार करने की तकनीकी जानकारी दी। 

 शस्य वैज्ञानिक डाॅ. के. सी. नागर ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना हेतु गोबर की उपलब्धता, लागत मूल्य एवं तैयार खाद के प्रयोग तथा विपणन की जानकारी देते हुए समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया। 
कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा के मृदा वैज्ञानिक डाॅ. रविकान्त शर्मा ने किसानों को मृदा एवं जल परीक्षण हेतु नमूने लेने एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार कृषि कार्य करने की जानकारी दी। पशुपालन वैज्ञानिक डाॅ. एच. एल. बुगालिया ने स्वरोजगार स्थापित करने हेतु वर्मी कम्पोस्ट इकाई के साथ डेयरी पालन करने पर बल दिया ताकि गोबर की उपलब्धता के साथ-साथ आमदनी में भी इजाफा हो। शस्य वैज्ञानिक डाॅ. रामावतार ने किसानों को केन्द्र के निरन्तर सम्पर्क में रहते हुए कृषि में होने वाले नवाचारो ंसे रूबरू होने एवं नवीनतम तकनीकों को समावेश करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। 
उद्यान वैज्ञानिक डाॅ. सुचित्रा दाधीच ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का कौशल विकसित पाॅली हाऊस एवं ग्रीन हाऊस में बेमौसम सब्जी उत्पादन द्वारा अधिक आय अर्जित करने का सुझाव दिया।
फार्म मैनेजर महेन्द्र सिंह चुण्ड़ावत ने कोराना महामारी के संक्रमण से बचाव के तरीके अपनाते हुए कृषि कार्य करने एवं जब तक दवाई नही तब तक ढ़िलाई नही एवं दो गज की दूरी है बहुत जरूरी सिद्धान्त का पालन करने की सलाह दी। सहायक कृषि अधिकारी नन्द लाल सेन ने किसानों का तापमान परीक्षण कर पंजीयन किया। प्रशिक्षण में किसानों को मास्क भी वितरित किए गए।