ALL भीलवाड़ा हलचल प्रदेश हलचल देश हलचल चित्तौडग़ढ़ हलचल विदेश मध्यप्रदेश हलचल राजसमंद हलचल कारोबार मध्य प्रदेश राशिफल
कोरोना से राहत नहीं मिली, पॉजीटिव के आंकड़े नहीं दे रहे निजी अस्पताल
October 17, 2020 • Raj Kumar Mali

भीलवाड़ा हलचल।  जिले में करीब सात माह से कोहराम मचा रही कोरोना महामारी से अभी भी राहत नहीं मिली है। पिछले कुछ दिनों से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पॉजीटिव रोगियों के जो आंकड़े जारी कर रहा है वह कम तो आ रहे है लेकिन केवल सरकारी अस्पताल में जांच कराने वालों के आंकड़े है। इनमें निजी चिकित्सालय में कोरोना जांच कराकर पॉजीटिव आने वाले रोगियों के आंकड़े नहीं जोड़े जा रहे है। लम्बे समय से ऐसा ही चल रहा है। निजी चिकित्सालय के संचालकों की लापरवाही आमजन पर भारी पड़ रही है तो सबंधित महकमा केवल नोटिस देकर मामलें से इति श्री कर रहा है। जी हां पिछले एक सप्ताह से कोरोना रोगियों की संख्या कम होने से जिलेवासियों को कोरोना से राहत मिलने के आसार दिखाई पड़ रहे है। लगातार घट रहे कोरोना रोगियों के कारण अधिकांश तो इसे कोरोना का अंत मान रहे है लेकिन संभलिए ऐसा नहीं है। लगातार घट रहे केसो को लेकर जब दैनिक लोकजीवन रिपोर्टर ने पड़ताल की तो सामने आया की जब से निजी अस्पतालों में कोरोना जांच सुविधा शुरू हुई है उसके पांच दिन बाद से ही अस्पताल संचालकों ने स्थानीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को पॉजीटिव रोगियों के आंकड़े  देना बंद कर रखा है। ना तो ये अस्पताल जांचों की संख्या बता रहे है और ना हीं पॉजीटिव व नेगेटिव रोगियों की संख्या। ऐसे में चिकित्सा विभाग भी केवल सरकारी अस्पताल में होने वाली कोरोना जांच कराने पर पॉजीटिव आने वाले रोगियों की संख्या ही मीडिया से शेयर कर रहा है। निजी चिकित्सालयों की इस लापरवाही पर कोई ठोस कदम उठाने के बजाय उन्हें केवल नोटिस देकर छोड़ दिया गया है। ऐसे में जिले की जनता तक  कोरोना की सच्चाई नहीं पहुंच पा रही है। विभाग की ढीलाई और निजी चिकित्सालय संचालकों की मनमानी जनता पर भारी पड़ रही है। लोग कम आंकड़ों को इस बीमारी का अंत मान रहे है।

निजी में जांच कराने वालों का नहीं है आंकड़ा

पिछले कुछ समय से निजी अस्पतालों में भी कोरोना की जांच की जा रही है। शुरूआत में तो चार-पांच दिन तक निजी लैब संचालकों ने कोरोना पॉजीटिव आने वालों की जानकारी उन्हें दी थी लेकिन अब नहीं दे रहे है। ऐसे में उन्हें नोटिस देकर कार्रवाई की जा रही है। निजी जांच केन्द्रों से आंकड़े नहीं मिलने से भी सरकारी लैब के अलावा अन्य रोगियों की संख्या पता नहीं चल पा रही है। जल्द ही जिलेवासियों को पूरे आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे।

डॉ. घनश्याम चांवला 

डिप्टी सीएमएचओ व आरआरटी प्रभारी 

 

लोग जांचे कराने भी नहीं पहुंच रहे, इसलिए सप्ताह में केवल २८१ मरीज

पिछले माह एक ही दिन में जहां रोगियों की संख्या ३०० पार हो गई थी, वहीं अब पिछले ७ दिनों में केवल २८१ मरीज ही कोरोना संक्रमित निकले। इसके पीछे पहला कारण तो निजी अस्पतालों में हो रही जांचों के आंकड़े संचालकों द्वारा चिकित्सा विभाग को नहीं देना, दूसरा पॉजीटिव के सम्पर्क में होने के बावजूद विभाग का दबाव नहीं होने के चलते लोगों का कोरोना जांच के लिए  नहीं पहुंचना, तीसरा कई लोगों का पॉजीटिव आने के डर से कोरोना जांच कराने से कतराना, चौथा कोरोना के लक्षण होने पर रोगी के निजी चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों को दिखाकर दवा लेकर ही काम चलाना है। 

 

पहले सम्पर्क वालों की जांच पर था ज्यादा जोर

पहले जब कोई व्यक्ति जांच कराने पर पॉजीटिव आता है तो विभाग की टीम उसके घर से लाती थी और उसे अस्पताल में भर्ती कर ठीक होने पर गुलाब के फूल के साथ डिस्चार्ज किया जाता था। परिजनों की भी अनिवार्य रूप से जांच करवाई जाती थी। लेकिन अब रोगियों की संख्या जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे वैसे ढीलाई भी बढ़ रही है। अब परिवार में किसी के पॉजीटिव आने पर परिजनों को तकलीफ नहीं होने की स्थिति में अनिवार्य रूप से जांच कराने के लिए नहीं कहा जाता है। 

 

जांच नहीं कराने के पीछे लोगों का तर्क

लक्षण होने के बावजूद कोरोना की जांच कराने नहीं पहुंच रहे कुछ लोगों से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था की घर में एक बीमार होता है और जांच कराने पर परिवार के सभी लोगों को पॉजीटिव बता दिया जाता है। इसलिए वे जांच नहीं करवा रहे। 

 

लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास

इस सबंध में जब एमजीएच अधीक्षक डॉ. अरूण गौड़ से बात की गई तो उनका कहना था की अब लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हुई है। लोग काफी जागरूक भी हो गए है। जनजागरण के चलते ही पॉजीटिव रोगियों की संख्या में कमी आई है। 

 

जनहित में जांच कराना बहुत जरूरी

कोरोना जांच कराने पर कोई नुकसान नहीं है बल्कि फायदा है। कम से कम पता तो चलेगा वो पॉजीटिव है या नेगेटिव । अगर वह नेगेटिव है तो कोई दिक्कत ही नहीं है लेकिन अगर पॉजीटिव है तो सुपर स्प्रेडर बन सकता है। एक ही व्यक्ति कई जगह घुमकर लोगों को संक्रमित कर सकता है। जब जांच की सुविधा है तो सर्दी, जुखाम, बुखार व खांसी के साथ ही सांस लेने में तकलीफ जैसे कोरोना लक्षण वाले व्यक्ति को तो हर हाल में जांच करानी चाहिए। यह परिवार, समाज व जनहित में है और पॉजीटिव के सम्पर्क वालों को पांचवे दिन जरूर जांच करानी चाहिए। 

डॉ. अरूण गौड़ 

अधीक्षक, महात्मा गांधी अस्पताल

 

एक सप्ताह में आए २८१ मरीज

१० अक्टूबर को ९८

११ अक्टूबर को ४२

१२ अक्टूबर को ६५

१३ अक्टूबर को ६

१४ अक्टूबर को २७

१५ अक्टूबर को १४

१६ अक्टूबर को २९