ALL भीलवाड़ा हलचल प्रदेश हलचल देश हलचल चित्तौडग़ढ़ हलचल विदेश मध्यप्रदेश हलचल राजसमंद हलचल कारोबार मध्य प्रदेश राशिफल
महिला सरपंचो के साथ बैठकों में रिश्तेदार बैठै तो छिनेगी सरपंची
October 16, 2020 • Raj Kumar Mali

जबरकिया   भेरु लाल गुर्जर / राज्य सरकार महिला जनप्रतिनिधियों को ज्यादा मजबूत एवं प्रभावी बनाना चाहती है। पंचायतीराज विभाग ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाया है। पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू होने से पहले तक ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों की जगह उनके पति ही सरपंचाई कर लेते थे, बहाना था कि अनपढ़ होने के कारण वह कामकाज नहीं कर सकती, लेकिन अब ऐसा नहीं चल सकेगा। नए आदेश के तहत निकट संबंधी और रिश्तेदार पंचायतों की बैठकों में भाग ले रहे हों या उनके कार्यालय का कार्य संपादित कर रहे हों, ऐसी सूरत में उनकी सरपंची तक छिन जाएगी। नियम के उल्लंघन होने पर महिला वार्ड पंच, पंचायत समिति जिला परिषद सदस्यों के खिलाफ भी यही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

 

महिला सरपंच तो बन बैठते है सरपंच प्रतिनिधि:- 

बिना कोई नौकरी मिले, कोई चुनाव लड़े सरपंच महिला का पति अब एसपी यानी सरपंच पति और महिला प्रधान के पति पीपी कहलाने लगे है। उनके रिश्तेदार सरपंच प्रतिनिधि बन जाते है। यहां तक कि पंचायतों में आने वाले अफसरों को भी वे अपना यहीं परिचय देते हैं। ग्राम पंचायतों में बैठकर महिला सरपंचों के स्थान पर बैठकर पंचायती करने के ताे कई मामले सामने चुके है। 

 

अधिकारियों-कर्मचारियों को चेतावनी

ग्रामपंचायतों की बैठकों कार्यालय का कार्य संपादित करने में सरपंच पतियों रिश्तेदारों काे काम करने या बैठने से नहीं रोकने तथा उनका सहयोग करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को भी चेतावनी दी गई है। शासन सचिव ने जिला कलेक्टरों, सीईओ विकास अधिकारियों से कहा है कि ऐसा पाए जाने पर दोषी अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी सीसीए नियमों के तहत कार्रवाई करें।

 

यह है पंचायती राज एक्ट की धारा 38

उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कलवानिया का कहना है कि पंचायतीराज कानून 1994 की धारा 38 में सरपंच को हटाने एवं निलंबन करने का प्रावधान है। राज्य सरकार पंचायती राज संस्था के किसी सदस्य सहित चेयरमैन और डिप्टी चेयरमेन को सुनवाई का मौका देते हुए पद से हटा या निलंबन कर सकती है। इसके लिए इस धारा में विस्तृत व्याख्या की गई है जिसके तहत सरकार यह कार्रवाई अमल में ला सकती है। इसके तहत दोषी जनप्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।

 

सरपंच को पंचायत कार्यालय में रहना होगा उपस्थित:- 

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत मुख्यालय में सरपंच को उपस्थित रहना होगा।  राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार स्पष्ट किया है कि सरपंच स्वंय प्रतिदिन कार्यालय समय में कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। यदि कुछ सरपंच लगातार तीन दिन तक कार्यालय से अनुपस्थित रहे तो ग्राम पंचायत के सचिव द्वारा इसकी लिखित सूचना विकास अधिकारी पंचायत समिति तथा जिला परिषद के नियंत्रण कक्ष में नोट कराई जाएगी। ऐसे सरपंच को पंचायती राज अधिनियम की धारा 32 (2) (ख) के तहत अनुपस्थित मानकर उपसरपंच को सरपंच का कार्य करने के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।

 

शिकायत पर हाेगी कार्रवाई:- 

ग्राम पंचायतों के सभी कार्मिकों तथा विकास अधिकारियों का विधिक दायित्व है कि पंचायती राज संस्थाओं के दैनिक कार्य संचालन में विधिक प्रावधानों तथा राज्य सरकार के निर्देशों की पालना करावे। यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी को शिकायत मिलने के उपरांत भी कार्रवाई नहीं की जाती है तथा अन्य स्रोतों से शिकायत की पुष्टि होती है तो ऐसे अधिकारी अवचार व अपकीर्तिकर आचरण का दोषी होगा।

 

शिकायत पर विकास अधिकारी करेंगे जांच: आरोप पत्र तैयार कर सीईओ को भिजवाएंगे

यदि सरपंच कार्यालय से अनुपस्थित है तथा उसका कोई परिजन सरपंच की सीट पर बैठता है कर्मचारियों को सरपंच की हैसियत बताकर निर्देश करता है या ग्राम पंचायत का रिकॉर्ड सरपंच को अवलोकन करवाने या हस्ताक्षर करवाने के लिए ग्राम पंचायत कार्यालय से बाहर ले जाता है तो सचिव द्वारा इसकी सूचना पंचायत समिति के विकास अधिकारी को की जाएगी। विकास अधिकारी ऐसे मामले में स्वयं जांच करेंगे तथा पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 (1) के तहत सरपंच के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद को भिजवाएंगे