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पत्रकार के भेष में PFI का एजेंट था कप्पन, जातीय हिंसा फैलाने के लिए जा रहा था हाथरस: SC में यूपी सरकार
November 21, 2020 • Raj Kumar Mali • देश हलचल
 

मथुरा
केरल बेस्ड जर्नलिस्ट की रिहाई को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा है कि वह यूपी सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करें। इससे पहले यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि आरोपी सिद्दिक कप्पन को हाथरस जाते हुए गिरफ्तार किया गया था और वह पीएफआई से जुड़ा है। साथ ही आरोप लगाया कि वह पत्रकार का चोंगा पहनकर वहां जा रहा था और हाथरस कानून व्यवस्था में खलल डालने और जातीय मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से जा रहा था। आरोपी कप्पन अवैध हिरासत में नहीं है बल्कि जूडिशियल कस्टडी में है। इस मामले में याचिकाकर्ता का कोई पक्षकार होने का अधिकार नहीं है। आरोपी खुद वकीलों और परिजनों के संपर्क में है और वह खुद अर्जी दाखिल कर सकता है।

यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि कप्पन पीएफआई का ऑफिस सेक्रेटरी था। उसने जर्नलिस्ट का आईकार्ड रखा हुआ था और केरल बेस्ड वह अखबार 2018 में बंद हो चुका था। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से कपिल सिब्बल पेश हुए हैं और अनुच्छेद-32 के तहत अर्जी दाखिल कर उसकी हिरासत को अवैध बताया है और उसे जमानत पर छोड़ने की मांग की है। केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की ओर से सिब्बल पेश हुए। राज्य सरकार ने कहा है कि याचिकाकर्ता इस मामले में पक्षकार नहीं हैं और जमानत की याचिका सुनने योग्य नहीं है। आरोपी कप्पन वकील के संपर्क में है और साथ ही परिजनों के संपर्क में भी हैं। पिछली सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था कि कप्पन को उनके वकीलों तक से नहीं मिलने दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था।

दो साल पहले बंद अखबार का था आईकार्ड
यूपी सरकार ने कहा कि पांच अक्टूबर को हाथरस जाते वक्त कप्पन को गिरफ्तार किया था। कप्पन ने केरल के एक न्यूजपेपर का आईडी रखा हुआ था जो दो साल पहले ही बंद हो चुका था। कप्पन पीएफआई का ऑफिस सेक्रेटरी है उसका उद्देश्य था कि वह हाथरस में कानून व्यवस्था में व्यवधान पैदा करे और जाति विभेद पैदा करे। मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और वह न्यायिक हिरासत में है ऐसे में ये कहना कि उसकी हिरासत अवैध है ये आरोप लगत है।

सिब्बल की दलील पर सरकार के जवाब
सिब्बल ने दलील दी थी कि कप्पन को वकील से नहीं मिलने दिया गया और परिजन से नहीं मिलने दिया गया इसी कारण वह सीधे सुप्रीम कोर्ट आए हैं। जबकि ये आरोप निराधार है। गिरफ्तारी के बाद उसे उसके परिजनों से बात कराई गई। मथुरा कोर्ट में पेशी के दौरान वकील से उसने बात की और केस की जानकारी दी। कप्पन ने अपनी मां से गिरफ्तारी के बाद तीन बार फोन पर बात की और ये तथ्य सामने है। किसी परिजन ने जेल में मिलने की कोई अर्जी नहीं लगाई है। कप्पन कई बैन ऑर्गेनाइजेशन का सदस्य है। गिरफ्तारी के दौरान वह अपने साथ बैनर लेकर चल रहा था कि मर जाएंगे या मार डालेंगे। वह जहां रहता है वहां सर्च के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं जिनकी छानबीन चल रही है।

गलत रिपोर्टिंग पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस मामले में पिछली सुनवाई के बारे में गलत रिपोर्टिंग पर सवाल उठाया और कहा कि हम गलत रिपोर्टिंग को लेकर चिंतित हैं। कई रिपोर्ट में कहा गया कि जर्नलिस्ट को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली और ये गलत रिपोर्टिंग थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अनफेयर रिपोर्टिंग है। इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि उनका इससे लेना देना नहीं है लेकिन आए दिन अनफेयर रिपोर्टिंग हो रही है। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि गलत रिपोर्टिंग को ठीक करने की जरूरत है।

5 अक्टूबर से जेल में बंद है कप्पन
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के जवाब पर कपिल सिब्बल से कहा कि आप उसे देखें और उस पर अपना पक्ष रखें। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को इस बात को लेकर कोई ऐतराज नहीं है कि वकील आरोपी से मिलें और उसके दस्तखत लें। बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाली जाती है इस दौरान वकील जेल से आरोपी का दस्तखत ले लें। कप्पन पिछले पांच अक्टूबर से जेल में बंद है।