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उद्योगपतियों को अपने उद्योग को परिवार की तरह मानना चाहिए-जिला कलक्टर
October 21, 2020 • Raj Kumar Mali

भीलवाड़ा हलचल। भीलवाडा ने वस्त्र उत्पादन में  अपना नाम पूरे विश्व में कर रखा है, उसे ओर आगे बढाने में जिला प्रशासन हर तरह से तत्पर है। उद्योगपतियों को अपने उद्योग को एक परिवार की तरह मानना चाहिए। श्रमिकों के सुख दुःख में भागीदार बनना चाहिए। एक उद्योगपति अपनी अच्छी एवं मददगार छवि बना कर रखेगा तो किसी भी विपरित परिस्थितियों में श्रमिक भी उनका साथ देगें। यह बात जिला कलक्टर शिव प्रसाद एम नकाते आज सायं भीलवाडा के टेक्सटाइल वीविंग उद्यमियों के साथ मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के संयोजन में आयोजित वर्चअल बैठक में कही। उन्होंने कहाकि रीको एरिया में  सडक, पानी, रोडलाइट आदि विभिन्न समस्याओं को देखने के लिए मैं व्यक्तिगत रुप से जिला अधिकारियों के साथ शीघ्र ही रीको एरिया का दौरा करुंगा। ग्रोथ सेन्टर में  चम्बल परियोजना से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रीको के पास 30 लाख रुपये की स्वीकृति आ गई है एवं शीघ्र ही चम्बल का पानी ग्रोथ सेन्टर में उपलब्ध होगा। बिलिया, रीको क्षैत्र के लिए रोडलाइट, सडक मरम्मत आदि के लिए जो धनराशि चाहिए, उसके लिए रीको प्रबंध निदेशक से बात की जाएगी।

इससे पूर्व मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री की ओर से पूर्वाध्यक्ष डॉ पी एम बेसवाल, टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष अतुल शर्मा, सिन्थेटिक्स वीविंग मिल्स एसोसियेशन के अध्यक्ष संजय पेडीवाल, लघु उद्योग भारती के महेश हुरकट एवं अनूप बागडोदिया ने विभिन्न समस्याओं को सामने रखा। चेम्बर के अध्यक्ष जी सी जैन ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी का स्वागत किया। मानद महासचिव आर के जैन ने संचालन किया।

बैठक में महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र विपूल जानी, उपश्रम आयुक्त संकेत मोदी, रीको के क्षैत्रीय प्रबंधक पी आर मीणा ने भी भाग लिया।

इन्होंने रखी यह बात:

पीएम बेसवाल

1.    रीको एरिया में सभी उद्योगों से रीको विकास शुल्क लेता है। एक इकाई कम से कम 35 हजार रुपये प्रतिवर्ष विकास शुल्क देती है। लेकिन अभी भी कुछ जगह रोड बननी बाकी है, एवं काफी जगह रोड मरम्मत की आवश्यकता है। इसके साथ ही पानी के निकास के लिए भी नालियों की उचित व्यवस्था नही है। रोड के आस-पास गन्दगी काफी है। सफाई की कोई व्यवस्था नही है।

2.    रीको औद्योगिक क्षैत्र में काफी जगह रोड लाइटें समुचित नही है।

3.    रीको औद्योगिक क्षैत्र में पूर्व में उद्योगों में चोरी की काफी घटनाएं हुयी थी, लेकिन अधिकतर मामलों में  कोई कार्यवाही नही हुयी। अभी तक एक भी गिरफ्तारी नही हुई है। 

अतुल शर्मा

1     उद्योगों के सामने एक नई समस्या ’’मौताणे’’ के रुप में  ऊभरी है। किसी उद्योग में  किसी श्रमिक के दुर्घटनावश या बीमारी के कारण भी मृत्यु होने पर, उद्योग से घर जाते हुए रास्ते में  किसी दुर्घटना या अस्वाभाविक मृत्यु होने पर, उद्यमियों पर मौताणे का दबाव बनाया जाता है, घेराबन्दी की जाती है, उद्योग में  तोड-फोड जैसी नौबत भी आ जाती है। जबकि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उद्योग उचित मुआवजा देते है।

2     चित्तौडगढ रोड पर स्थित विभिन्न उद्योगों से पिछले कुछ समय से असामाजिक तत्व हावी है। वे, अनुचित तरीके से अवैध वसूली के लिए, जबरदस्ती कॉन्टेªक्ट लेने, मासिक बन्धी बांधने आदि के लिए उद्योगों में  अनाधिकृत प्रवेश कर डराने-धमकाने, मारपीट, तौडफोड आदि की घटनाएं कर रहे है। उद्योगों के अधिकारियों के साथ रास्ते में भी मारपीट की घटनाएं बार-बार हो रही है। 

3     लोकडाउन के बाद भीलवाडा के प्रमुख सभी औद्योगिक संगठनों, प्रमुख औद्योगिक इकाईयों, जिला प्रशासन के मध्य दिनांक 20 मई 2020 को सौहाद्रपूर्ण वातावरण में  हुए समझौते के अनुसार लोकडाउन अवधि का भुगतान किया गया है। समझौते की अन्य शर्तो का सभी पक्षों को विशेषरुप से श्रमिक संगठनों को भी पालना करने के लिए पाबंध किया जाए।

संजय पेडीवाल

वीविंग इकाईयों की सबसे बडी समस्या विभिन्न कार्यो के लिए ठेकेदार है। कभी-कभी किसी ठेकेदार का कार्य संतोषप्रद नही होने पर उसे बन्द करने पर कम्पनी/इकाई में कार्यरत सभी श्रमिक ठेकेदार कार्य बन्द करके बाहर आ जाते है, एवं उस औद्योगिक इकाई का कार्य बाधित हो जाता है। ऐसी स्थिति में कार्यरत ठेकेदारों में बदलाव करना, उन्हें निकालना या उनके बजाय स्वयं के श्रमिक रखना मुश्किल होता है। समझौते के बाद भी विभिन्न बैठकों में हुए निर्णय का पालना नही की जा रही है।

महेश हुरकट

जो लघु इकाईयां पीएफ या ईएसआई में कवर नही होती है, वहां किसी दुर्घटना, घायल, मृत्यु होने पर मुआवजे के लिए आम सहमति से दिशा निर्देश जारी किये जाए। श्रमिकों को कार्य के दौरान मोबाइल लेकर आने पर प्रतिबंधित किया जाए।