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वेदाध्ययन के लिए गंभीर चिंतन की आवश्यकता- प्रो.त्रिवेदी
November 8, 2020 • Raj Kumar Mali • प्रदेश हलचल

 चित्तौड़गढ़ हलचल।  गोविन्दगुरू जनजाति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.आईवी त्रिवेदी ने कहा कि नई शि़क्षा नीति के आलोक में वेदाध्ययन की दृष्टि से गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। प्रोफेसर त्रिवेदी श्री कल्लाजी वैदिक विश्व विद्यालय के वेद एवं वेदंाग संकाय द्वारा नई शिक्षा नीति के परिपेक्ष्य में वेद अध्ययन की दशा एवं िदशा विषयक संगोष्ठि में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होेंने प्राचीन ज्ञान विज्ञान को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो भारतीय वेदाध्ययन कर विश्व में भारतीयता को दर्शाने का प्रयास करते है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का गर्व है कि देश और दुनिया में वेदों का स्थान सर्वोपरि रहा है इसी कारण भारत विश्वगुरू कहलाया। संगोष्ठि में मोहनलाल सुखाडिया विश्व विद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. नीरज शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि 34 वर्षो बाद शिक्षा नीति में बदलाव निश्चित तौर पर एक सकारात्मक पहल और भारतीयता को लेकर किया गया है। इस शिक्षा नीति में भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान एवं संस्कारों की भाषा संस्कृत वेद अध्ययन आदि को जोड़ा गया है। जो मुख्यतया सीबीसीएस पाठ्यक्रम को केंद्रीत कर बनाया गया है। वाग्वर वैदिक शिक्षा परिषद बांसवाड़ा के सचिव डाॅ विशेष पण्ड्या व निदेशक महिपाल सिंह सहित कई अतिथियों ने वैदिक विश्वविद्यालय की गौशाला, यज्ञ शाला, नव ग्रह एवं नक्षत्र वाटिका के साथ ही औषधीय वृक्षों को देखकर विश्वविद्यालय के प्रयासों की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की वहीं, बटुकों द्वारा यज्ञशाला में आयोजित पद्म पुराण का श्रवण करते हुए यज्ञ में सहभागिता निभायी। विश्वविद्यालय के चैयरपर्सन कैलाश मूंदड़ा ने विश्वास दिलाया कि वैदिक विश्वविद्यालय भविष्य में बांसवाड़ा वेदपीठ तथा अन्य संस्थाओं के सहयोग से प्रो.त्रिवेदी सहित अन्य विद्वानों के मार्गदर्शन में चरमोंत्कर्ष प्राप्त करने से यहां से निकली वैदिक गंगधारा संपूर्ण सनातन मतावलंबियों को सिंचित करते हुए संपूर्ण राष्ट्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। प्रशासनिक भवन में आयोजित संगोष्ठि के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा ठाकुर जी के विग्रह का पूजन, सरस्वती को माल्र्यापण के साथ दीप प्रज्जवलन से किया गया। इस दौरान चारो वेदों के आचार्यो के मंगलाचरण ने वातावरण को वेदमयी बना दिया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ स्मिता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत तथा कुलसचिव डाॅ मधुसुदन शर्मा द्वारा विश्वविद्यालय की अब तक की प्रगति से अवगत कराया। संगोष्ठि का संचालन डाॅ मृत्युंजय तिवारी ने किया, वेदविभागाध्यक्ष प्रो. दीपक पालीवाल ने आगंतुको का आभार व्यक्त किया। इस दौरान वेदपीठ के पदाधिकारियों के साथ ही विश्वविद्यालय के शौध निदेशक डाॅ दीलीप कुमार कर, ग्रंथालय विज्ञान अध्यक्ष डाॅ अश्वििनी यादव, योगविभाध्यक्ष डाॅ रामनारायण मिश्र सहित वेदविद्यालय के आचार्यगण एवं बटुक उपस्थ्ति थे।