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व्हाट्सएप कॉल से चल रहा है बजरी का खेल
October 20, 2020 • Raj Kumar Mali

जहाजपुर देवेन्द्र सिंह राणावत/  उपखंड क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद भी बनास नदी में अवैध खनन माफियाओं पर लगाम नहीं है। अवैध बजरी के  पहिए को रोकने को लेकर ना तो सरकार व प्रशासन और ना ही आम नागरिक गंभीर है। यही कारण है कि जिले में अवैध बजरी के पहिए को रोकने के लिए विशेष अभियान चल रहा है उसके बावजूद भी अवैध बजरी के पहिए नहीं रुक पा रहे हैं। क्योंकि माफिया को संरक्षण देने वाले कॉल आज भी नहीं रुक पा रहे हैं। जिससे लगता है कि अधिकारियों के बड़े-बड़े दावे औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है। बनास नदी में बजरी का अंधाधुंध खनन से बनास अपना अस्तित्व खोती जा रही है। आश्चर्यजनक बात तो यह कि सुप्रीम कोर्ट की रोक और जिले में बजरी के पहिए को रोकने के लिए जिला कलेक्टर और एसपी मैडम द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है उसके बावजूद माफिया बिना कानून से डरे बनास नदी से अवैध खनन कर सड़कों पर बजरी के पहिए दौड़ा रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें संरक्षण देने वाले उनके विभाग के हैं?

         जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा जिला कलेक्टर शिव प्रकाश नकाते और एसपी प्रीति चंद्रा के निर्देश पर बनास नदी में बढ़ते अवैध बजरी खनन और खनन माफिया पर नकेल कसने के लिए 15 से 30 अक्टूबर तक जिला प्रशासन ने विशेष अभियान चलाया है। जिले में विशेष अभियान चलने के बावजूद बजरी माफिया बेखौफ बजरी परिवहन कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। क्योंकि विशेष अभियान माफिया को संरक्षण देने वालो पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। जिला प्रशासन को बजरी के पहियों को रोकना है तो आखिरकार संरक्षण दे रहे व्हाट्सएप काॅल को रोकना होगा। वरना यह विशेष अभियान भी पहले चलाऐ गए अभियानों की तरह एक दिखावे का अभियान बनकर रह जाएगा। क्षेत्र में बजरी माफिया बनास का गहना चोरी कर रहे हैं, विभिन्न मार्गो से देर रात ओर सुबह करीब 4से5 बजे बजरी परिवहन कर प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं। समय समय पर खानापूर्ति के लिए पुलिस और खनन विभाग द्वारा कार्रवाई की गई है किन्तु सवाल ये उठता है कि क्या अवैध बजरी परिवहन को रोकना ही समस्या का समाधान है? तो बजरी खनन को संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई क्यों नही की जा रही? अब तक माफियाओं पर ओर मुख्य खनन क्षेत्र में दबिश देकर कोई भी कार्रवाई नही करना प्रशासन की खामिया उजागर करता है। ऐसे में आमजन के सामने सवाल ये उठता है कि जिला प्रशासन माफिया और माफिया को संरक्षण देने वालों पर कब कार्रवाई करता है।

 

 व्हाट्सएप कॉल से चलता है बजरी का खेल इसलिए नहीं रुक पा रहा है 

जहाजपुर उपखंड क्षेत्र में बजरी माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें कानून का भी डर नहीं है क्योंकि उन्हें संरक्षण देने वाले हैं कानून के जानकार हैं क्षेत्र में बजरी का खेल व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से चल रहा है बजरी माफिया को संरक्षण देने वाले माफियाओं से व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं और कहां बजरी खाली करनी है और कहा  से बजरी निकाली है यह सब जानकारी व्हाट्सएप कॉल पर ही ली जाती है और दी जाती है इसलिए अवैध बजरी रुकने का नाम नहीं ले पा रही है। 

 

  माफिया और माफिया को संरक्षण देने वालों पर चलाना होगा विशेष अभियान 

 

भीलवाड़ा जिले में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी अवैध बजरी खनन नहीं रोक पाया है अवैध खनन को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में भी कई बार अभियान चलाया गया है लेकिन जहाजपुर क्षेत्र में पूर्व में चलाए गए अभियान का कोई असर नहीं दिखा है।क्योंकि माफिया और माफिया को संरक्षण देने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी अब जिला प्रशासन एक बार फिर बजरी के पहिए को रोकने के लिए अभियान चलाया है लेकिन प्रशासन को अवैध पहिए को रोकने से पहले माफिया और संरक्षण देने वालों पर अभियान चलाकर कार्रवाई करनी होगी। तब जाकर अवैध बजरी के पहिए रुक पाएंगे।

 माफिया को संरक्षण देने वाली व्हाट्सएप कॉल भी रोकनी होगी 

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद भी अवैध बजरी के पहिए नहीं रुकना यह दर्शाता है कि आज भी इन्हें संरक्षण देने वाले जिंदा है बजरी का अव़ैध खेल में सबसे ज्यादा काम आने वाली व्हाट्सएप कॉल है इस व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से ही अवैध बजरी के पहिए चल रहे हैं। संरक्षण देने वाली व्हाट्सएप कॉल भी जिला प्रशासन को रोकनी होगी।